लोकमंच पत्रिका

लोकचेतना को समर्पित

शिलावहा: अतीत और वर्तमान से मुक्त निरे भविष्य की महागाथा

हिंदी साहित्य के मिथकीय लेखन पर बात की जाए तो वहाँ पुरुषों का आधिपत्य नहीं एकाधिकार है | या तो स्त्रियों ने इतना साहस नहीं दिखाया या उन्हें चिन्हित नहीं किया गया | चूँकि इस क्षेत्र में चुनौतियां अधिक हैं क्योंकि पौराणिक आख्यान हमारी रग-रग में इस कदर रचे बसे हैं कि उन्हें जन-जीवन से अलग किया जाना सम्भव नहीं है | एक समस्या यह भी है कि वह हमारे

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बिरहा सम्राट पद्मश्री हीरालाल यादव का निधन

अपनी लोकगायकी ‘ बिरहा ‘ के माध्यम से करोड़ों लोगों के दिल में बसने वाले हीरालाल यादव का 11 मई 2019 शनिवार को बनारस के एक अस्पताल में निधन हो गया। उनके निधन की खबर सुनकर पूर्वांचल के क्षेत्रों में शोक की लहर दौड़ गई। वे 83 वर्ष के थे और पिछले कई दिनों से गंभीर रूप से बीमार थे। शनिवार देर रात उनके पार्थिव शरीर को चौका घाट स्थित

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पूर्व प्रधानमंत्री स्व. राजीव गांधी का आईएनएस विराट से सैर सपाटा

‘फिजूल खर्ची साफ दिखाई दे रही थी। देश के सबसे प्रमुख युद्धपोत आईएनएस विराट का इस्तेमाल राजीव गांधी के परिवार की सवारी के तौर पर किया गया। इस दौरान 10 दिनों तक अरब सागर में ही घूमता रहा। इस युद्धपोत पर होने वाला दैनिक खर्च बेहिसाब है क्योंकि यह जहां भी जाता है, इसके साथ सुरक्षा पोतों का पूरा काफिला चलता है। बताया जाता है कि इस काम के लिए

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अमृता प्रीतम के उपन्यासों में चित्रित नारी

इशरत-ए-क़तरा है दरिया में फ़ना हो जाना दर्द का हद से गुज़र जाना है दवा हो जाना -ग़ालिब जीवन परिचय : अमृता प्रीतम ने अपने जीवन में जिस दर्द को जिया, वही उनकी रचनाओं में दवा की तरह उतर कर आया है. 31 अगस्त, 1919 को गुजरांवाला (पाकिस्तान) में करतार सिंह हितकारी तथा राज कौर के यहाँ जन्मी अमृता का सम्पूर्ण जीवन और लेखन एक ऐसी स्त्री की कहानी है

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प्रियदर्शन की तीन कविताएं

सफल लोगों के बारे में एक असफल आदमी की कविता मेरे आसपास कई सफल लोग हैं अपनी शोहरत के गुमान में डूबे हुए। जब भी उन्हें कोई पहचान लेता है वे खुश हो जाते हैं और अक्सर ऐसे मौकों पर अतिरिक्त विनयशील भी जैसे जताते हुए कि उन्हें तो मालूम भी नहीं था कि वे इतने सफल और प्रसिद्ध हैं और बताते हुए कि उन्हें तो पता भी नहीं है कैसे आती है सफलता और कैसे

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अमूर्त्त मुद्दों पर लड़ रहा विपक्ष- अरुण कुमार

लोकसभा चुनाव 2019 के चार चरण पूरे हो चुके हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र से मुक़ाबले के लिए अब तक धूर विरोधी पार्टियों ने आपस में गठबंधन कर लिया है। लेकिन चुनाव में जीत गठबंधन से ज्यादा मुद्दों पर निर्भर करती है। ऐसे में विपक्षी पार्टियों के नेताओं के भाषणों को सुनें तो हम पाते हैं कि उनके पास कोई भी मुद्दा नहीं है जिनके आधार पर वे मोदी सरकार को कठघड़े में

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बूथ कैप्चरिंग : बिहार के दो गांवों की कहानी

हाल ही में भारतीय जनता पार्टी के दरभंगा से सांसद कीर्ति झा आजाद कांग्रेस में शामिल हुए। कांग्रेस में शामिल होने के बाद उनके संसदीय क्षेत्र दरभंगा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वागत समारोह का आयोजन किया था। इस समारोह में उन्होंने कहा कि पहली बार जब मैं चुनाव लड़ रहा था तब मेरे लिए बूथ कैप्चरिंग की गई थी तथा मेरे पिता और बिहार के भूतपूर्व मुख्यमंत्री भागवत झा आज़ाद

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मोदी है तो मुमकिन है

भारतीय की वर्तमान विदेश नीति की एक और बड़ी सफलता। पुलवामा आतंकी घटना के 75 दिन बाद पूरी दुनिया ने पाकिस्तान को केन्द्र मानकर अपनी गतिविधि चला रहे मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी मान लिया गया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मसूद अजहर को अब अन्तर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित कर दिया है। संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद ने जैश-ए- मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर के खिलाफ इस प्रकार की सख्त

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कर्पूरी ठाकुर: तिरस्कार झेलकर जिसने बिहार बदला

पुण्य स्मरण:-  24 जनवरी 2018 को देश के सबसे प्रभावशाली समाजवादी-लोहियावादी नेताओं में से एक कर्पूरी ठाकुर का 96 वां जन्मदिवस है। उनका जन्म एक ऐसे परिवार में हुआ था, जो जन्मतिथि नहीं लिखकर रखते और न ही जन्मपत्री बनवाते हैं। स्कूल की रजिस्टर में उनकी जन्मतिथि 24 जनवरी 1924 दर्ज है इसलिए इसे ही उनका असली जन्मदिन मान लिया गया है।आज के दिन बिहार में बड़े पैमाने पर कर्पूरी

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मीडिया,महिला और न्याय

       भारत में बलात्कार की घटनाएं खूब होती हैं। राष्ट्रीय क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार भारत में पिछले 3 वर्षों में 35000 महिलाएं बलात्कार की शिकार हुईं। राष्ट्रीय क्राइम  रिकॉर्ड ब्यूरो का ही एक रिपोर्ट कहता है कि 2014 में प्रतिदिन औसतन 93 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटनाएं घटीं। ये वे आंकड़ें हैं जो पुलिस द्वारा रिकॉर्ड की गई लेकिन पूरे देश

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सांस्कृतिक कैलेंडर पर विवाद

बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने राज्य से संबंधित साहित्यकारों, महापुरुषों की याद में आयोजित होने वाले सांस्कृतिक कार्यक्रमों व महोत्सवों पर खर्च होने वाले आवंटित धन राशि के बारे में सांस्कृतिक कैलेंडर जारी किया है। इस सांस्कृतिक कैलेंडर में विभिन्न साहित्यकारों व महापुरुषों के लिए आवंटित धन में एकरूपता नहीं है बल्कि किसी के लिए अधिक धन आवंटित किए गए हैं तो किसी के लिए बहुत

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