लोकमंच पत्रिका

लोकचेतना को समर्पित
रेखा चमोली की कविता- “मैं तुमसे प्रेम करती हूं”

प्रेम का रास्ता किसी चीज के गुम होने की अनुभूति कराता है – जी के चेस्टरसन

प्रेम जीवन में ताजगी लाता है -हेलन केलर

प्रेम कभी दावा नहीं करता, वह तो हमेशा देता है। प्रेम हमेशा कष्ट सहता है। न कभी झुंझलाता है, न बदला लेता है – महात्मा गांधी

प्रेम मानवता का दूसरा नाम है – गौतम बुद्ध

प्रेम करना ही जीवन की खुशी है – जॉर्ज सेंड

लोकमंच पत्रिका
लोकमंच पत्रिका

मैं तुमसे प्रेम करती हूं

इसीलिए

तुम्हारे साथ सती नहीं हो गयी

मैं तुमसे प्रेम करती हूं

इसलिए

हमारे बच्चों को और ज्यादा प्यार और संभाल से देख रही हूं

मैं तुमसे प्रेम करती हूं

इसीलिए

बिस्तर में पड़ी नहीं हूं

अपने बचे खुचे साहस के साथ जीवन से लड़ रही हूं

क्योंकि मैं जानती हूं

तुमने एक मजबूत और जिंदादिल लड़की से प्रेम किया था।

रेखा चमोली, लोकमंच पत्रिका

रेखा चमोली, ऋषि शिवराम शिक्षण संस्थान, जोशीयाड़ा उत्तरकाशी, उत्तराखंड।

कवि अरुण शीतांश के फ़ेसबुक वॉल से साभार

Leave comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *.