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बिहार विधान सभा: एक-दूसरे को आईना दिखाते रहे मुख्‍यमंत्री और अध्यक्ष- वीरेंद्र यादव

आज बिहार विधानसभा में एक अप्रत्याशित घटना घटी जिसने लोकतंत्र को शर्मसार कर दिया। 16 वर्षों से बिहार के मुख्यमंत्री की कुर्सी पर काबिज नीतीश कुमार विधानसभा अध्यक्ष से ही उलझ गए। पढ़ें, पूरी बहस –

मुख्यमंत्री: एक मिनट आप, अध्यक्ष महोदय, अभी आपने कहा है इसके बारे में कि इसका परसों फिर दीजिए यह बिल्कुल नियमों के प्रतिकूल है। आपको कहना चाहता हूं। मैं सुन रहा था इसीलिए हम हाउस में आए हैं, इसीलिए हम हाउस में आए हैं। यह काम है सरकार का जवाब देना और मैंने ऑथराइज किया है अपनी तरफ से इनको इस बात के लिए करना, हम बैठकर के सुन रहे हैं। ये तो बता रहे हैं कि पूरी इंक्वायरी हो रही है और जब पूरी इंक्वायरी हो रही है तो हो गया। यह हाउस की चीज है? जब इंक्वायरी हो रही है और यह हुआ इसके लिए कोर्ट है और जब इंक्वायरी होती है कोई चीज के बारे में और मामला जाता है कोर्ट में, आप हाउस में पूछ रहे हैं, हाउस में बताया जा रहा है और जो इंक्वायरी होती है यह काम करना पुलिस का काम है, आप इंटरफेयर नहीं कर सकते हैं और जरा संविधान देख लीजिए। आप संविधान देख लीजिए। देख लीजिए, एक बात जान लीजिए, मुझको तो आश्चर्य होता है, हम इतने दिनों से हैं और फिर इस तरह की बात होती है। सारे लोगों को एक बात जानना चाहिए, संविधान क्या कहता है। आप जब इंक्वायरी हो रही है, इंवेस्टिगेशन हो रहा है कोई चीज, ये उसका अधिकार है और अगर वह गड़बड़ करेगा, सरकार की तरफ से, डिपार्टमेंट की तरफ से गाइडलाइन यही है कि निश्चित रूप से करना और आप जानते हैं हर बार हम एक-एक बात कहते हैं, न हम किसी को फंसाते हैं, न हम किसी को बचाते हैं। ये काम नहीं है सरकार का, यह बात क्यों बार-बार आपलोग कर रहे हैं? इस बात को लेकर के अगर चलियेगा तो इस तरह से हाउस चला रहे हैं? आज तक कभी नहीं हुआ जो इस तरह की बात होती है। मैं अपने सभी सदस्यों से भी कहूंगा कि इस तरह से बार-बार आप इस सवाल को पूछिएगा?

विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और स्पीकर विजय सिन्हा, लोकमंच पत्रिका

अध्यक्षः माननीय मुख्यमंत्री जी।

मुख्यमंत्रीः सुन लीजिए, जब जवाब दे दिया गया, इंक्वायरी हो रही है और कहा गया है कि सारी इंक्वायरी होगी और इंक्वायरी की रिपोर्ट से आपको मतलब है या इंक्वायरी की रिपोर्ट कोर्ट में जाएगी और तीन बनी हुई जगह है तो इसको अधिकार है? हाउस को अधिकार है ? आप हमको जरा बताइये तो ?

अध्यक्षः माननीय

मुख्यमंत्रीः नहीं, कंस्टीट्यूशन निकालिए।

अध्यक्षः माननीय मुख्यमंत्री जी, आसन की बात भी सुनी जाये।

मुख्यमंत्रीः आप इस तरह से हाउस चलाइएगा? मुझे बहुत तकलीफ हुई है।

अध्यक्षः आसन की भी बात सुनी जाये।

मुख्यमंत्रीः मैं आज जानकर के सुन रहा था। आप सुन लीजिए, मैं जानकर के और समय पर आकर के सुन रहा था।

अध्यक्षः आसन की भी बात सुनी जाये।

मुख्यमंत्रीः सुन लीजिए, आप एक-एक बात जान लीजिए। यह बात किसी भी तरह से मंजूर नहीं है, यह ऐक्सेप्टेबल नहीं है।

अध्यक्षः जब प्रश्नकर्ता ने प्रश्न उठाया कि कुर्की-जब्ती हुई है कि नहीं, माननीय मुख्यमंत्री जी जब प्रश्नकर्ता कुर्की-जब्ती की बात उठाई तो ये जवाब नहीं दे पाए। माननीय मंत्री जी आपके जवाब नहीं दे पाए कुर्की-जब्ती पर।

मुख्यमंत्रीः सुन लीजिए, यह कोर्ट का काम है। आप सुन लीजिए, रिपोर्ट हाउस में सब्मिट होता है? रिपोर्ट कोर्ट में जाता है। कहीं भी क्राइम होगा…

अध्यक्षः कुर्की-जब्ती पर जानकारी…

मुख्यमंत्रीः तो उसका पूरा का पूरा इंवेस्टिगेशन होगा, वह जाएगा कोर्ट में और कोर्ट उस पर इंक्वायरी करके सजा देगी। आपका यह काम नहीं है। आप पूछ रहे हैं, जवाब दिया जा रहा है। अब आप कहियेगा इसको फिर करेंगे, इसका मतलब है संविधान का खुलेआम उल्लंघन कर रहे हैं।

अध्यक्षः माननीय मुख्यमंत्री जी, अब सुना जाये।

मुख्यमंत्रीः इस तरह से नहीं चलेगा, इस तरह से नहीं चलेगा, यह बिल्कुल बर्दाश्त नहीं है।

अध्यक्षः तो आप ही बता दें जैसे चलेगा उसी तरह से चलाएंगे।

मुख्यमंत्रीः आप कौन हैं जो कह रहे हैं कि आज नहीं इसको दूसरे दिन देंगे….

अध्यक्षः मैं आसन से संरक्षित सदस्यों को करने के लिए…

मुख्यमंत्रीः आप करियेगा, और आपको मालूम है अभी हमने क्या कहा है 60 दिन के अंदर पूरी इंक्वायरी करो। अभी बीच में जहां-जहां दिक्कत हो रही थी, एससी/एसटी की बैठक हुई, उसमें हमने क्या निर्देश दिया है और फिर हमने डिपार्टमेंट को कहा और डिपार्टमेंट के माध्यम से हमलोग पूरी मुस्तैदी से लगे हैं और कहीं भी कोई क्राइम करेगा, उसको किसी को बचाने नहीं देंगे हमलोग। एक बात अच्छी तरह से जान लीजिए, लेकिन इन सब चीजों को लेकर के, अपने इलाके की कोई बात को लेकर के, यह हाउस की चीज नहीं है, यह इंटरफेरेंस नहीं करना चाहिए, यह बात हम कह देते हैं और हम तो बैठे सुन रहे थे इसलिए आप इसके बारे में यह नहीं कह सकते हैं कि आज हो गया, आप इसके बाद फिर बताइये। ये क्या बताएंगे, ये तो आपको बता ही रहे हैं।

अध्यक्ष: माननीय…मुख्यमंत्री: सुन लीजिए, अगर यह बात हुई है, मैं निश्चित रूप से आज भी पूछूंगा डिपार्टमेंट से, आज भी मैं पूछूंगा कि इतनी तेजी से, क्या कोई दिक्कत हुई है, मैं इस केस के बारे में पूरी जांच करूंगा। आज हमको ये दे रहे हैं कि जो जवाब दिए हैं, जब हम इनको ऑथराइज किए हैं, आज हम देखेंगे लेकिन कृपा करके इन सब चीजों के बारे में ज्यादा नहीं करिए, ये सब करना अच्छी बात नहीं है। तो इसलिए हम इतना ही कहेंगे, आग्रह करेंगे कि जो चीज जिसका अधिकार है और जो चीज जो करना है, हाउस में कुछ भी पूछ सकते हैं, हाउस में जवाब दिया जाता है लेकिन किसी भी चीज के मामले में वह रिपोर्ट इस हाउस का नहीं है, रिपोर्ट कोर्ट में जाता है। इसलिए इस बात को अच्छी तरह याद रखिए कि जो चीज बनी हुई है, संविधान में जो व्यवस्था है, कौन-सा काम किसको करना है, वह बहुत ज्यादा निर्धारित है और उस निर्धरण के हिसाब से ही चलना चाहिए और पहली बार हम देख रहे हैं, इतने दिनों से, हमको एमएलए के रूप में भी रहने का काम मिला है और चौथी बार हमको यहां पर काम करने का मौका मिल रहा है, यह पहली बार हम देख रहे हैं। ऐसा तो आजतक कभी हुआ ही नहीं। ऐसा नहीं होना चाहिए। इसलिए हम हाथ जोड़कर प्रार्थना करेंगे कि अगर इसके बारे में कोई भ्रम है तो फिर बातचीत करेंगे हमलोग और कहीं भी कोई भी डिले है, किसी इंवेस्टिगेशन में, हम सारे मामलों में, आज ही हम मीटिंग बुलाएंगे और आज ही हम कहेंगे किसी चीज में कितने में तुम्हारा इंवेस्टिगेशन में कितना समय लगा और इंवेस्टिगेशन ससमय किया जा रहा है या नहीं किया जा रहा है।

इन सब चीजों को जरूर पूछेंगे। अभी मंत्री जी ने बता दिया है कि इसके बारे में पूरा देखा जा रहा है और इसको किया जाएगा, इस बात को ध्यान रखिए। हाउस में हर चीज को आज नहीं, फिर कल यह हाउस का काम नहीं है ।

अध्यक्षः माननीय मुख्यमंत्री जी, सदन में जब प्रश्न आया कि कुर्की-जब्ती कब तक होगा, उसी में एक मामला इन्होंने जोड़ा जिसके कारण तीन बार सदन के अंदर सारे विधायकों ने उठकर के हंगामा किया। हमने आग्रह किया कि विशेषाधिकार कमेटी में चल रहा है उस पर चर्चा नहीं होगी। मामला हुआ कि आयोजनकर्ता, उद्घाटनकर्ता की आज तक अरेस्टिंग नहीं हुई, दर्शक दीर्घा में बैठे लोगों को अंदर भेजकर 19 दिन के बाद जेल से निकले, इस मामले को सरकार क्यों गंभीरता से नहीं ली? आज जब हुआ कि कुर्की-जब्ती कितने लोगों की हुई। वही घटना में जिस घटना में सरस्वती पूजा के मामले में कि निर्दोष को लाकर के खानापूर्ति पुलिस कर दी है और दुर्भाग्य से मुख्यमंत्री जी, ये घटना मेरे क्षेत्र से जुड़ा है, आपका गुस्सा जायज है और संविधान हमसे ज्यादा आप जानते हैं। इसमें भी दो मत नहीं है, हमलोग तो आपसे सीखते हैं।

आसन तो आपसे क्या, जो वरिष्ठ लोग हैं, उनसे भी सीखते हैं और सदन सब के सहयोग से चल रहा है लेकिन आपके उस जीरो टॉलरेंस का मामला, न्याय के साथ विकास का मामला, कानून का राज्य स्थापित करने का, न बचाते हैं, न फंसाते हैं, तो सदन में तीन बार हंगामा हुआ, सारे पक्ष और प्रतिपक्ष के सदस्य खड़े हुए और उन्होंने कहा कि दर्शक दीर्घा के व्यक्ति को आपने जेल भेज दिया, जो कि थाना से भी जमानत मिलती है, लेकिन योजनकर्ता, उद्घाटनकर्ता पर आपने कार्रवाई नहीं की, जो पदाधिकारी वहां मौजूद थे उस पर भी आपने कार्रवाई नहीं की। आसन को हतोत्साहित और डिमॉरलाईज करने की सिर्फ बात नहीं हो, पारदर्शिता के साथ व्यवस्था बने और हमको तो आप सब लोग मिलकर बैठाए हैं, मैं तो आप ही की भावना को स्थापित कर रहा हूं कि कोई भी गलत करेंगे, कानून के साथ खिलवाड़ करेंगे, विधायिका को कमजोर करना चाहेंगे और प्रशासनिक अराजकता फैलाना चाहेंगे, जो मुख्यमंत्री कतई नहीं होने देंगे और आपकी अच्छी बात है।

हम चाहते हैं कि पूरे मामले को आप गंभीरता से अपने स्तर से दिखवा लें। यह तो दुर्भाग्य है कि मेरे क्षेत्र से जुड़ा है और आप खुद कई बार कहे हैं कि विधायक पूरे बिहार का, कहीं के भी प्रश्न को, कहीं की भी व्यवस्था को देख सकते हैं। उन्होंने पूछा कि कुर्की-जब्ती अभी तक नहीं हुई, आपने अभी भी बोला कि 60 दिन के अंदर नहीं करेगा तो कार्रवाई करेंगे, 60 दिन से ऊपर हो गया मामला। क्षेत्र जाते हैं, माननीय मुख्यमंत्री जी यह सम्मान आपलोगों ने ही दिया है, जाते ही लोग क्वेश्चन खड़ा कर देते हैं, पूछते हैं, आप इतने बड़े आसन पर बैठकर के और एक दारोगा का, एक थाना प्रभारी का, एक डीएसपी की भी बात को नहीं रख पाते हैं, विधायिका के कई प्रश्न इस पर उठे हैं, आपलोगों की बैठक में यह मामला उठा है। जैसा आप कहे, जैसे कहें सदन चलाना, उसी तरह से सदन चलेगा, लेकिन सरकार के संरक्षण में, सरकार की नीति के हित में ही हमलोग यह व्यवस्था बना रहे हैं।

लोकमंच पत्रिका
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मुख्यमंत्री: हम भी समझते हैं कि इसमें कोई कंफ्रयूजन नहीं होना चाहिए। अगर इस हाउस में कोई बात आई और आपने हाउस में, कमेटी में वह बना दिया है, वह कमेटी एक-एक चीज को देखकर के अपना रिकमेंडेशन देगी और निश्चित रूप से जब कमेटी का रिकमेंडेशन आ जाएगा तो उसके बाद तो सरकार देखेगी।

अध्यक्ष: अभी इस मामले को हमलोग यहीं स्थगित करते हैं। अपने स्तर से माननीय मुख्यमंत्री जी देखेंगे और मुख्यमंत्री जी ही अब अवगत करायेंगे।

मुख्यमंत्री: अगर आप बीच-बीच में बराबर बोलियेगा, बात नहीं सुनियेगा, तब हम कभी कुछ बोलेंगे ही नहीं।

अध्यक्ष: नहीं-नहीं, आप बोलिए।

मुख्यमंत्री: हम आपको एक बात कह रहे हैं अगर कोई इशू हुआ है और जिसकी आप चर्चा कर रहे हैं और उसको लेकर के एक कमेटी बन गई, कमेटी नहीं, मतलब उसको आपने विशेषाधिकार समिति को दे दिया, अब विशेषाधिकार समिति एक-एक चीज को देखने के बाद अपनी राय व्यक्त करेगी और जब अपनी राय व्यक्त करेगी तो हम आपको इतना कहते हैं कि हम गवर्नमेंट में उस राय पर फिर से विचार जरूर करेंगे और दिखवायेंगे कि एक तरफ से उनलोगों ने यह कहा और आप लोगों ने यह कहा है, फैक्ट क्या है? उसको हम जरूर दिखवायेंगे। एक बात हम जरूर कहेंगे लेकिन हाउस का काम है वह करेगा, रिकमेंड करेगा, उसके बाद उसको फिर से दिखवायेंगे हम और दिखवाकर के जो कुछ भी असली चीज होगी, उस चीज को सामने लाया जाएगा, इसलिए इसके लिए अब कोई बात हो गई तो बात हो गई, उसको रोज-रोज चर्चा करने की जरूरत नहीं है। जब एक बार हाउस ही में उसको कर रहे हैं तो उसको देख लिया जाएगा, निश्चित रूप से देख लिया जाएगा, उसके लिए कोई चिंता मत कीजिए, हमलोग ऐसा नहीं और हम तो चाहते ही हैं हम सब दिन बोलते हैं कि हाउस में जिनलोगों को जो उचित लगे वह प्रश्न उठाइए, इस बात को रखिए, जवाब दिया जाता है तो वह सब चीज तो किया ही जाएगा इसमें कोई शक नहीं है। लेकिन इस चीज को अकारण इसको आगे बढ़ाने की जरूरत नहीं है। जब एक बार आपने उसको दे दिया तो उसके बाद फिर अब इसको रोज-रोज उसकी चर्चा करने की आवश्यकता नहीं है, इतना हम आपसे जरूर आग्रह करेंगे।

वीरेन्द्र यादव, लोकमंच पत्रिका
वीरेन्द्र यादव, लोकमंच पत्रिका

यह पूरी बहस पटना के वरिष्ठ पत्रकार वीरेन्द्र यादव ने उपलब्ध कराई है। श्री वीरेन्द्र यादव ‘वीरेन्द्र यादव न्यूज’ नामक अखबार निकालते हैं। आपको बिहार की राजनीति के साथ जाति के संबंधों का विश्लेषण करने वाले विशेषज्ञ पत्रकार के रूप में जाना जाता है।

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