लोकमंच पत्रिका

लोकचेतना को समर्पित
नवीन जोशी की कविता- हाय! गहलोत सरकार
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गहलोत सरकार के तीन साल

काले कारनामों के हुए कमाल।

चोरों के हौसले बढ़ चुके हैं

मंदिर को भी नहीं छोड़ चुके हैं

हर पंडित, मंदिर की यही पुकार

सुरक्षित कर दो हमारा परिवार।

शिक्षक भी हैवान हुए हैं

विद्यालय भी मसान हुए हैं।

बालिकाओं की यही पुकार

ध्यान क्यों न देती सरकार

बलात्कारी बेखौफ हुए हैं

जैसे उनमें रोब कहीं है

चारों तरफ यह चीख-पुकार

ध्यान क्यों न देती सरकार

बेरोजगारों के साथ छल हुआ है

परीक्षा पहले पेपर हल हुआ है

दोषियों को सजा का फल न मिला है

बेरोजगारों की एक ही पुकार

साफ-सुथरे तरीके से भर्ती करो सरकार।

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मंहगी बिजली, पेट्रोल, डीजल

चाहते आमजन को हर रोज एक कल

वेट कम ना करने का यह नतीजा रहा है

महंगाई की चक्की में आम आदमी पीस रहा है।

राजस्थान की भर्तियाँ भंडारा हुई है

बाहरी अभ्यर्थियों के लिए सर्दी का अंगारा हुई है

राज्य के अभ्यर्थियों की एक ही पुकार

बाहरी अभ्यर्थियों की पाबंदी हो सरकार।

नवीन कुमार जोशी, शोधार्थी, राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर
संपर्क सूत्र:-7737626466

8,723 thoughts on “नवीन जोशी की कविता- हाय! गहलोत सरकार

  1. Today, I went to the beach with my children. I found a sea
    shell and gave it to my 4 year old daughter and said “You can hear the ocean if you put this to your ear.” She put the shell to her
    ear and screamed. There was a hermit crab inside and it pinched her ear.
    She never wants to go back! LoL I know this is totally off topic but I had to
    tell someone!

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