लोकमंच पत्रिका

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मनोरंजन की राह में टूटा ‘हेलमेट’

हमारे देश के युवाओं की सबसे बड़ी समस्या क्या है आज के समय में जानते हैं। वे सम्बन्धों में सेक्स तो चाहते हैं लेकिन एक बहुत बड़ी संख्या ऐसे युवाओं की भी है जो कॉन्डम खरीदने से झिझकते हैं। उन युवाओं की झिझक को शायद कुछ हद तक दूर कर पायेगी। कॉन्डम को लेकर हमारी सरकारें भी बहुत कुछ करती आई हैं ताकि सुरक्षित यौन सम्बंध बनाकर होने वाली बीमारियों से बचा जा सके। 

यह फ़िल्म भी आपको उसी राष्ट्रीय समस्या को बताती है कि वह समस्या है ‘कंडोम’ की। देश की बढ़ती आबादी और असुरक्षित सेक्स से होने वाली बीमारी के बचाव के लिए कंडोम कितना जरूरी है। यह भी फ़िल्म बताती है। जनसंख्या विस्फोट को लेकर वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण की एक छोटी सी क्लिप भी आपको इस फ़िल्म में नजर आएगी। तो आइए जानते हैं कहानी क्या है। 

हेलमेट फिल्म: लोकमंच पत्रिका
हेलमेट फिल्म: लोकमंच पत्रिका

दरअसल फ़िल्म की कहानी में एक लड़का है जो बड़े  घर की लड़की को पसन्द करता है। लड़का 11वीं तक पढ़ा है और अब शादी-ब्याह में गाना गाता है। जिस परिवार के बैंड में यह लड़का काम करता है उसी बड़े घर की लड़की से इश्क कर बैठता है। उसके एक दोस्त है जिसकी कहानी सीधा शुरू होती है एक आदमी को लोन की रकम चुकाने से। एक और दोस्त भी है जो क्या करता है और फ़िल्म में क्यों है यह समझ नहीं आता। खैर जो लड़का इश्क करता है वह अपने इन दो दोस्त के साथ मिलकर एक ट्रक लूटते हैं। जिसमें बड़े माल के नाम पर निकलते हैं कॉन्डम के पैकेट। 

अब क्या होगा उनका? लड़का शादी कर पाएगा? क्या ये कॉन्डम रूपी हेलमेट उनके जीवन की कहानी को बचा पाएगा? कॉन्डम की बात पर फिल्म के पहले पोस्टर से ही जोर दिया जा रहा था कि फिल्म समाज के उस हिस्से पर व्यंगात्मक रूप से चोट करे, जो आज भी कंडोम खरीदने ही नहीं बल्कि उसके बारे में बात करने से भी झिझकता है। 

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फ़िल्म टैबू जैसे विषय को सिरे से उठाती तो है। लेकिन उसकी राह में रोड़े लगाती है तो इसकी डबिंग, बैकग्राउंड स्कोर, कई जगहों पर फिसलती हुई एक्टिंग तो कहीं ओवर एक्टिंग। हां गाने भी कुछ ऐसे ही है, एक गाने को छोड़ कर।  फ़िल्म देखने से पहले आपने अगर इसका ट्रेलर देखा है तो यह फ़िल्म आपको ज्यादा पसन्द नहीं आएगी और अगर मेरी तरह फ़िल्म देखने के बाद ट्रेलर देख रहे हैं तो उसका कोई फायदा नहीं। ट्रेलर देखने वाले लोग इसके ट्रेलर को ही दो, चार बार देख लें तो फ़िल्म पूरी हो जाएगी समझो समय और धन भी बचेगा। फिर मत कहना बताया नहीं हां नहीं तो। 

ज़ी 5 के ओटीटी प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई निर्देशक सतराम रमानी की फ़िल्म ‘हेलमेट’ की  कहानी तो निर्देशक ने अच्छी उठाई लेकिन उसमें कई जगह कुछ सीन भी जबरन घुसेड़े हुए नजर आते हैं। फ़िल्म की स्टार कास्ट में लीड रोल में पहली बार में ही अपारशक्ति खुराना दिखाते हैं कि उन्हें आगे किसी फ़िल्म में लीड रोल में लेने ये लिए निर्देशकों को दो बार सोचना पड़ेगा। प्रनूतन बहल, अभिषेक बनर्जी, आशीष वर्मा, आशीष विद्यार्थी और शारिब हाशमी कोई भी अपनी एक्टिंग से ज्यादा कमाल नहीं करते। फ़िल्म की सिनेमैटोग्राफी और कैमरामैन का काम जरूर संतुष्ट करता है। एक जरुरी बात हमारे देश के लोग अगर इन गर्भ निरोधक कहे जाने वाले कॉन्डम्स का इस्तेमाल करता तो आज इस देश की, दुनिया की, आबादी दुनिया की आबादी में इतनी न होती। 

अपनी रेटिंग – 2 स्टार 

तेजस पूनियां, लोकमंच पत्रिका
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लेखक- तेजस पूनियां , शिक्षा- शिक्षा स्नातक (बीएड) , स्नातकोत्तर हिंदी , पता – फ्लैट नंबर 601, स्काई वे बिल्डिंग, नजदीक – गोरस भंडार, मुरलीपुरा, जयपुर – 302039, संपर्क -9166373652, ईमेल- tejaspoonia@gmail.com

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