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एंटी ट्रैफिकिंग डे की पूर्व संध्या पर बीबीए ने ट्रैफिकिंग के शिकार बाल मजदूरी से मुक्त कराए गए 20 बच्चे

इंटरनेशनल एंटी ट्रैफिकिंग डे ( 30 जुलाई ) की पूर्व संध्या पर बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए) ने ट्रैफिकिंग के शिकार बाल मजदूरी से मुक्त कराए गए 20 बच्चे

नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित बाल अधिकार कार्यकर्ता श्री कैलाश सत्यार्थी द्वारा स्थापित बचपन बचाओ आंदोलन (बीबीए ने) इंटरनेशन एंटी ट्रैफिकिंग डे (30 जुलाई) की पूर्व संध्या पर पूर्वी दिल्ली के खजूरी इलाके से बाल मजदूरी के शिकार 20 बच्चों को पुलिस की मदद से छापामार कार्रवाई के तहत मुक्त कराया है। इनमें से 15 बच्चे दिल्ली के बाहर के रहने वाले हैं और ट्रैफिकिंग के जरिए लाए गए थे। गारमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले इन नाबालिक बच्चों में से दो लड़कियां भी हैं। इस छापामार कार्रवाई में पुलिस के साथ स्थानीय एसडीएम शरद कुमार भी मौजूद थे। इस जुर्म में फैक्ट्री मालिक सहित सात लोगों को पुलिस ने गिरप्तार कर लिया है।  

यह गारमेंट फैक्ट्री पुलिस थाने से महज कुछ दूरी पर ही स्थित है। यानी पुलिस की नाक के नीचे ही यह गैरकानूनी काम चल रहा था। तकरीबन सभी बच्चे 14 से 16 साल के बीच के हैं और उत्तर प्रदेश और बिहार के रहने वाले हैं। इनमें से 15 बच्चे ट्रैफिकिंग के जरिए ही दिल्ली लाए गए थे।

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एसडीएम की पूछताछ और कानूनी कार्रवाई के बाद इन बच्चों को बीबीए द्वारा संचालित पुनर्वास केंद्र मुक्ति आश्रम में भेज दिया जाएगा। बीबीए के कार्यकारी निदेशक श्री धनन्जय टिंगल कहते हैं, “कल पूरी दुनिया वर्ल्ड डे अंगेस्ट ट्रैफिकिंग इन पर्सन्स मनाएगी। ऐसे में देश की राजधानी दिल्ली में संसद से महज 25 किलोमीटर दूर ट्रैफिकिंग के शिकार बच्चों से बाल मजदूरी यह दर्शाती है कि हमें ट्रैफिकिंग रोकने के लिए एक सख्त कानून की जरूरत है। सरकार को प्रस्तावित एंटी ट्रैफिकिंग बिल- ट्रैफिकिंग इन पर्सन्‍स (प्रीवेंशन, केयर एंड रीहैबिलिटेशन) बिल-2021- को फौरन संसद में पास कराना चाहिए।”

अधिक जानकारी के लिए आप बचपन बचाओ आंदोलन के कार्यकारी निदेशक धनजंय टिंगल 9205585900 से संपर्क कर सकते हैं।

लोकमंच पत्रिका, संपादक, डॉ अरुण कुमार
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लोकमंच पत्रिका ब्यूरो, दिल्ली

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