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दक्षिण अफ्रीका ने बिहार को बनाया टूरिज्म पार्टनर – अरुण कुमार

दक्षिण अफ्रीका और उसके आसपास के देशों में बसे भारतीयों और विशेषकर बिहारियों को बिहार के पर्यटन स्थलों का भ्रमण करने के प्रति जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से यह कार्यक्रम तैयार किया गया है। पढ़ें-

दक्षिण अफ्रीका, मॉरीशस, मेडागास्कर, कैरिबियाई देशों, सूरीनाम फ़िजी और अन्य देशों में जाकर बसने वालों में बिहार के लोगों की संख्या बहुत अधिक है। अंग्रेज़ी औपनिवेशिक काल में बिहार के मजदूरों को इन देशों में खेतिहर और खदान में काम करने के लिए ले जाया गया था। ये लोग वापस स्वदेश नहीं लौट पाए और यहीं बसकर इन देशों को अपने खून-पसीने से सींचा। इन लोगों ने वहां की संस्कृति में अपनी संस्कृति को मिलाकर एक नई संस्कृति को जन्म दिया। इन लोगों में आज भी अपने देश, अपनी माटी और अपनी जड़ों से जुड़ने की छटपटाहट दिखाई देती है। वे अपने पारिवारिक संस्कारों और रीति-रिवाजों का स्रोत तलाशना व देखना चाहते हैं। दक्षिण अफ्रीका और अन्य देशों में बसे इन बिहारी लोगों की इच्छाओं का सम्मान करते हुए जोहान्सबर्ग स्थित कॉन्स्युलेट जनरल ऑफ इंडिया ने एक अनूठी पहल की है और पर्यटन के जरिये इन लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर दिया है।

लोकमंच पत्रिका, संपादक, डॉ अरुण कुमार
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दक्षिण अफ्रीका के जोहानसबर्ग स्थित कॉन्स्युलेट जनरल ऑफ इंडिया ने बिहार को अपना टूरिज्म पार्टनर बनाया है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने भी सहमति दे दी है। बिहार का पर्यटन मंत्रालय इस पार्टनरशिप को अमलीजामा पहनाने के लिए रोडमैप तैयार करना शुरू कर दिया है। बिहार सरकार का पर्यटन मंत्रालय दक्षिण अफ्रीका में यहां के पर्यटन स्थलों की जानकारी उपलब्ध कराएगा। वहां बिहार आने के लिए लोगों को आमंत्रित किया जाएगा। अब तक बिहार के पर्यटक स्थलों की जानकारी के अभाव में दक्षिण अफ्रीकी देशों से जो भी पर्यटक भारत आते हैं वे आगरा और जयपुर घूमने चले जाते हैं।

दक्षिण अफ्रीका के अलावा इसके पड़ोसी देशों जिम्बॉब्वे, नामिबिया, बोत्सवाना, लेसेथो, स्वाजीलैंड, मोजाम्बिक आदि में भी बिहार के पर्यटक स्थलों के बारे में प्रचार-प्रसार किया जाएगा और लोगों को बिहार में घूमने आने के लिए जागरूक करने के उद्देश्य से कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन देशों में भी बिहारी मूल के लोगों की संख्या काफी है। दक्षिण अफ्रीका में भारतीय मूल के लोगों की आबादी 15 लाख के करीब है। इनमें से तीस प्रतिशत से अधिक यानी 5 लाख लोग ऐसे हैं जो बिहार से गए हैं।

अंजु रंजन

अंजु रंजन हैं मुख्य सूत्रधार

अंजु रंजन इस पूरे कार्यक्रम की सूत्रधार हैं। आप जोहान्सबर्ग स्थित भारतीय महावाणिज्य दूतावास की कॉन्सुल जनरल हैं और बिहार के नालंदा जिले के हिलसा प्रखंड के अतरामचक गाँव की रहने वाली हैं। अंजु रंजन के पति रंजन कुमार भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी हैं और वर्तमान में लखनऊ के कमिश्नर हैं। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, दिल्ली से एमटेक अंजु रंजन 2002 बैच की भारतीय विदेश सेवा की अधिकारी हैं। इससे पहले आप नेपाल और इंग्लैंड में भी कॉन्सुल जनरल रह चुकी हैं।

वो कागज की कश्ती, अंजु रंजन की पुस्तक

अंजु रंजन एक साहित्यकार भी हैं। इनकी अब तक ‘प्रेम के विभिन्न रंग’, ‘वो कागज़ की कश्ती’ और ‘विस्थापन की यादें’ पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। ‘वो कागज़ की कश्ती’ लेखिका के बचपन की स्मृतियों की अभिव्यक्ति है। ‘विस्थापन और यादें’ पुस्तक की भूमिका में उन्होंने लिखा है कि ‘मेरी यादों के सहारे आप भी विस्थापन को झुठलाते हुए अपने गांव देश पहुंच सकते हैं। हिन्दी साहित्य में उनकी विशेष रुचि है। वे विदेश में भी हिन्दी के प्रचार-प्रसार से जुड़ी हैं।

लेखक- डॉ अरुण कुमार, असिस्टेंट प्रोफ़ेसर , लक्ष्मीबाई महाविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय व सम्पादक, लोकमंच पत्रिका। सम्पर्क- 8178055172, 9999445502 , lokmanchpatrika@gmail.com

1,821 thoughts on “दक्षिण अफ्रीका ने बिहार को बनाया टूरिज्म पार्टनर – अरुण कुमार

  1. Hey there! I know this is kinda off topic but Iwas wondering if you knew where I could get a captcha plugin for my comment form?I’m using the same blog platform as yours and I’m having difficulty finding one?Thanks a lot!