लोकमंच पत्रिका

लोकचेतना को समर्पित
जीवन के मनोभावों की प्रस्तुति- डॉ जय शंकर शुक्ल

डॉ जय प्रकाश शुक्ल ने डॉ चम्पा प्रिया नोनिया के आलेख संग्रह “जीवन दर्पण” की समीक्षा की समीक्षा लिखी है। डॉ चम्पा प्रिया नोनिया ने अपने जीवन से जुड़े मनोभावों को लेखों के माध्यम से अभिव्यक्त करने का सार्थक प्रयास किया है। चम्पा के विचार और उनके आदर्श को समझने के उद्देश्य से यह पुस्तक पढ़ने योग्य है- सम्पादक, लोकमंच पत्रिका

डॉक्टर चंपा प्रिया नोनिया का पहला आलेख संग्रह “जीवन दर्पण” के नाम से एन.के. पब्लिकेशन, जयपुर द्वारा प्रकाशित किया गया । वस्तुतः यह पुस्तक डॉक्टर चंपा की मनोभाव को लेखों के रूप में प्रस्तुत करने का एक व्यवस्थित प्रयास कहा जा सकता है । अपने लेख संग्रह में रचनाकार ने जीवन के विविध भावों को बड़े ही अच्छे ढंग से प्रदर्शित किया है, चंपा के लेख उनके विचार, उनके भाव और उनके आदर्श को समाज के सामने उपदेशात्मक रूप से प्रस्तुत करने का एक माध्यम है ।

जीवन दर्पण, लोकमंच पत्रिका
जीवन दर्पण, लोकमंच पत्रिका

अपनी पुस्तक में डॉक्टर चंपा ने अपनी भाव भावाव्यक्ति को बड़े ही सुकोमल ढंग से शब्दों के माध्यम से सामने रखा है । डॉक्टर चंपा के प्रेरणादायक लेखों अपने शीर्षक अपने कथ्य और अपने प्रवाह के प्रति पूरी तरह से उत्तरदाई हैं । उनके लेखों में समाज के विविध भाव दिखाई पड़ते हैं वह एक तरफ एक उपदेशक की भूमिका में है तो दूसरी तरफ एक शिक्षक की और यह दोनों ही भूमिका उनकी लेखों में स्पष्ट दृष्टिगोचर होती हैं । उनके लेखों में एक रूपक, मुहावरों का प्रयोग किया गया है  । उन्हें समाज की  प्रवृत्तियों का अनुमान है, उन्होंने अपने लेखन में अपने विचारों के प्रकटीकरण में अपने भाव के उद्बोधन में यह ध्यान रखा है यह समाज हमेशा अपने कार्य अपने व्यवहार में उर्द्ध्व गामी रहे यह आपकी पुस्तक के लेखों की सबसे बड़ी विशेषता है जिसको पाठक पढ़ कर  सहज ही अनुभव कर सकता है ।

लोकमंच पत्रिका
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चंपा के लेख मूलत: समाज की अनेक धाराओं का शाब्दिक समंवय कहा जा सकता है । मध्यवर्गीय परिवार की समस्याओं को विद्यार्थियों की उधेड़बुन से भरी व्यंजनों को शिक्षकों की आदर्श आत्म प्रवृत्तियों के अपनाने में आने वाली कठिनाइयों को शब्दों के द्वारा लेखों के रूप में पेश करना डॉक्टर चंपा की बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा सकती है।

“जीवन दर्पण” वास्तव में जीवन का ऐसा दर्पण है जिसको पढ़ने पर पाठक को अपना स्वयं का जीवन दिखाई पड़ता है यूं तो चंपा ने ये लेख अपने अनुभूतियों को शब्द देने का प्रयत्न के रूप में लिखा है लेकिन मेरा दावा है कि “जीवन दर्पण” रूपी आलेख संग्रह में अपना अक्स देखने वाले हर पाठक को उसके अपने जीवन की विभिन्न प्रवृत्तियां निश्चित रूप से दिखाई पड़ेगी और यही से फिर सुधार समन्वय समायोजन की एक प्रक्रिया शुरू होती है जो लेखक को युगीन प्रवृत्तियों का अनुगायक बनाती है । चंपा अपनी लेखों में पूरी तरह सजग हैं उपदेश उनके लेखों का मूल है, एक ही रूप को लेकर उन्होंने अपनी रचनाओं को अलग-अलग प्रवृत्तियों के रूप में रचा है इनकी रचनाएं मूलतः कहीं न कहीं कबीर की साखियां और सबद के रूप में अपने अंतर्गत पाए जाने वाले समाज केंद्रित विचारों को समर्पित हैं ।

डॉक्टर चंपा अपने लेखन में बहुत ही सतर्क है इनके लेखों में यह कहीं भी ऐसी बातें नहीं करती जो समाज में नकारात्मक प्रवृत्तियों को आगे बढ़ाने में सहयोग दें बल्कि इनका योगदान समाज के लोगों में सद प्रवृत्तियों का विकास है। डॉक्टर गर्ग साहब जो कि इनके मेंटर और मार्गदर्शक भी हैं, उनके सहयोग को इन्होंने न केवल जिया है अपितु सामने भी रखा है।

“जीवन दर्पण” वास्तव में जीवन का ऐसा दर्पण है जिसको पढ़ने पर पाठक को अपना स्वयं का जीवन दिखाई पड़ता है यूं तो चंपा ने ये लेख अपने अनुभूतियों को शब्द देने का प्रयत्न के रूप में लिखा है लेकिन मेरा दावा है कि “जीवन दर्पण” रूपी आलेख संग्रह में अपना अक्स देखने वाले हर पाठक को उसके अपने जीवन की विभिन्न प्रवृत्तियां निश्चित रूप से दिखाई पड़ेगी और यही से फिर सुधार समन्वय समायोजन की एक प्रक्रिया शुरू होती है जो लेखक को युगीन प्रवृत्तियों का अनुगायक बनाती है ।

अपने लेखों के रूप में “जीवन दर्पण” चंपा की पहली कृति है पहला आलेख संग्रह है और जैसा कि पुस्तक में घोषित किया गया है कि इनका एक उपन्यास प्रकाशित होने वाला है तो इस तरह हम देख पा रहे हैं कि हिंदी साहित्य में लंबे समय तक याद रखा जाएगा डॉक्टर चंपा ने समाज की विसंगतियों-विषमताओं को सार्थक एवं सकारात्मक ढंग से प्रेरणात्मक स्रोतों के माध्यम से प्रस्तुत करते हुए यह अपेक्षा की है कि समाज निरंतर आगे बढ़े हर व्यक्ति अपने चरित्र का विकास कर सके । आने वाले दिनों में एक सुंदर समाज की परिकल्पना को चंपा का लेख आकार देता सा प्रतीत होता है चंपा की इस किताब में एक आने वाले उपन्यास का भी जिक्र है मैं समझता हूं कि चंपा का लेखन बहुविध है न केवल लेख, कविताएं अपितु हिंदी गद्य एवं पद्य विधाओं के विभिन्न रूप आकारों में सक्षम रूप से लेखनी चलाने का हुनर डॉक्टर चंपा ने अपने अभ्यास से अपने प्रयास से हासिल किया है।

लेखिका चम्पा प्रिया नोनिया , लोकमंच पत्रिका
लेखिका चम्पा प्रिया नोनिया , लोकमंच पत्रिका

यह पुस्तक लोगों के आकर्षण का लोगों के पठन-पाठन का प्रमुख केंद्र बने ऐसी मेरी कामना है । मैं ईश्वर से यह प्रार्थना करूंगा कि लेखिका समाज में नवीनतम प्रवृत्तियों को शुरू करने को लेकर कटिबद्ध चंपा प्रिया की किताबें इनकी रचनाएं ऐसे ही अनवरत आती रहें और यह साहित्य के शिखर को सुशोभित करें ।

समीक्षकडॉ.  जय शंकर शुक्ला, दिल्ली

57 thoughts on “जीवन के मनोभावों की प्रस्तुति- डॉ जय शंकर शुक्ल

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