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मात्र दिवस बनकर रह गया पृथ्वी दिवस- तेजस पूनियां

दुनियाभर में साल में दो दिन पृथ्वी दिवस मनाया जाता है- 21 मार्च और 22 अप्रैल। 1970 से हर साल 22 अप्रैल को मनाए जाने वाले विश्व पृथ्वी दिवस का सामाजिक-राजनीतिक महत्व है। आइए तेजस पूनियां के इस लेख के माध्यम से जानते हैं- सम्पादक, लोकमंच पत्रिका।

‘विश्व पृथ्वी दिवस’ एक वार्षिक आयोजन है, जिसे 22 अप्रैल को दुनिया भर में पर्यावरण संरक्षण के लिए समर्थन प्रदर्शित करने के लिए आयोजित किया जाता है। इसकी स्थापना अमेरिकी सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने 1970 में एक पर्यावरण शिक्षा के रूप की थी। अब इसे 192 से अधिक देशों में प्रति वर्ष मनाया जाता है। संयुक्त राष्ट्र में पृथ्वी दिवस को हर साल मार्च एक्विनोक्स (वर्ष का वह समय जब दिन और रात बराबर होते हैं) पर मनाया जाता है, यह अक्सर 20 मार्च होता है, यह एक परम्परा है जिसकी स्थापना शांति कार्यकर्ता जॉन मक्कोनेल के द्वारा की गयी। यह पृथ्वी का बडा ही मानक जाने बाला दिवस है।

पृथ्वी दिवस का महत्व इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि, इस दिन हमें ग्लोबल वार्मिंग के बारे में पर्यावरणविदों के माध्यम से पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव का पता चलता है। पृथ्वी दिवस जीवन संपदा को बचाने व पर्यावरण को ठीक रखने के बारे में जागरूक करता है। जनसंख्या वृद्धि ने प्राकृतिक संसाधनों पर अनावश्यक बोझ डाला है, संसाधनों के सही इस्तेमाल के लिए पृथ्वी दिवस जैसे कार्यक्रमों का महत्व बढ़ गया है।

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जाने-माने फिल्म और टेलिविज़न अभिनेता एड्डी अलबर्ट ने पृथ्वी दिवस, के निर्माण में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायी। हालांकि पर्यावरण सक्रियता का सन्दर्भ में जारी इस वार्षिक घटना के निर्माण के लिए अलबर्ट ने प्राथमिक और महत्वपूर्ण कार्य किये, जिसे उसने अपने सम्पूर्ण कार्यकाल के दौरान प्रबल समर्थन दिया, लेकिन विशेष रूप से 1970 के बाद, एक रिपोर्ट के अनुसार पृथ्वी दिवस को अलबर्ट के जन्मदिन, 22 अप्रैल, को मनाया जाने लगा।

एक अनजान व्यक्ति रॉन कोब ने एक पारिस्थितिक प्रतीक का निर्माण किया, जिसे बाद में पृथ्वी दिवस के प्रतीक के रूप में अपनाया गया और लोस एंजिल्स फ्री प्रेस में 7 नवंबर 1969 को प्रकाशित किया गया और फिर इसे सार्वजनिक डोमेन में रखा गया। यह प्रतीक “E” व “O” अक्षरों के संयोजन से बनाया गया था जिन्हें क्रमशः “Environment” व “Organism” शब्दों से लिया गया था। इसे एक ध्वज का प्रतिरूप दिया गया यह सम्भवतः संयुक्त राज्य के ध्वज के प्रतिरूप से लिया गया था और इसमें एक बाद एक तेरह हरी और सफ़ेद पट्टियां थीं। विज्ञापन मुद्रण के क्षेत्र में सक्रिय लेखक जुलियन केनिग 1969 में नेल्सन की संगठन समिति में सीनेटर थे और उन्होंने ही इस घटना को “पृथ्वी दिवस” नाम दिया था। इस आन्दोलन को मनाने के लिए 22 अप्रैल का दिन चुना गया इस दिन केनिग का जन्मदिन भी होता है।

विश्व पृथ्वी दिवस, लोकमंच पत्रिका
विश्व पृथ्वी दिवस, लोकमंच पत्रिका

एक बार साल 1969 के नवम्बर महीने की तारीख 30 को न्यूयार्क टाइम्स में, सामने के पेज पर, एक लम्बे लेख में, ग्लेडविन हिल ने लिखा – “पर्यावरण संकट” की बढती चिंता राष्ट्रों को प्रभावित कर रही है, जो छात्रों को वियतनाम में युद्ध में भाग लेने के लिए प्रेरित कर रही है। पर्यावरण की समस्या के प्रेक्षण का एक राष्ट्रीय दिन, जो वियतनाम में सामूहिक प्रदर्शन के समान है, अगले वसंत के लिए इसकी योजना बनायी जा रही है, जब सीनेटर जेराल्ड नेल्सन के कार्यालय से समन्वित राष्ट्रव्यापी पर्यावरणी ‘शिक्षण’ का आयोजन किया जायेगा। 

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सेनेटर नेल्सन ने इस घटना में राष्ट्रीय स्तर पर समन्वय के लिए डेनिस हायेस को भी नियुक्त किया। इसके बाद 22 अप्रैल 1970 को पृथ्वी दिवस ने आधुनिक पर्यावरण आंदोलन की शुरुआत का रूप धारण कर लिया। लगभग 20 लाख अमेरिकी लोगों ने, एक स्वस्थ, स्थायी पर्यावरण के लक्ष्य के साथ भाग लिया। 200 मिलियन लोगों का 141 देशों में आगमन और विश्व स्तर पर पर्यावरण के मुद्दों को उठा कर, पृथ्वी दिवस 1990 में 22 अप्रैल को पूरी दुनिया में पुनः चक्रीकरण के प्रयासों को उत्साहित किया और रियो डी जेनेरियो में 1992 के संयुक्त राष्ट्र पृथ्वी सम्मलेन का आयोजन करने के लिए रास्ते साफ हुए। 

2007 का पृथ्वी दिवस अब तक के सबसे बड़े पृथ्वी दिवसों में से एक था, जिसमें अनुमानतः हजारों स्थानों जैसे कीव, युक्रेन, काराकास, वेनेजुएला, तुवालु, मनीला, फिलिपींस, टोगो, मैड्रिड, स्पेन, लन्दन, और न्यूयार्क के करोड़ों लोगों ने इसमें हिस्सा लिया। कहा जाता है कि पृथ्वी दिवस की धारणा को सीनेटर जेराल्ड नेल्सन ने सेंटा बारबरा से घूम कर आने के बाद शुरू किया, यह शुरुआत 1969 में भयंकर तेल रिसाव के ठीक बाद हुई। वे यह देखकर इतने आग-बबूला हुए कि वे वॉशिंगटन वापस लौट आये और 22 अप्रैल को पृथ्वी दिवस मनाने के लिए एक राष्ट्रीय दिवस के रूप में एक चर्चित बिल पारित किया। 

आज भारत समेत पूरी दुनिया में साफ और शुद्ध हवा के लिए लगातार आवाजें उठ रही हैं। रोटी, कपड़ा, मकान जैसी मूलभूत आवश्यकताओं के बाद शुद्ध हवा भी मनुष्य का जन्मसिद्व अधिकार के से रूप में महसूसा जाने लगा है। क्यों न हम हमारे जन्मदिन आदि विशेष दिनों पर कम से कम ग्यारह पेड़ लगाएं उनकी देखभाल करें तो यह पृथ्वीलोक वास्तव में हमारे जीने लायक बन पाएगा। वरना आने वाली पीढ़ियां हमें अवश्य दोष देने के लिए तैयार खड़ी हैं। 

तेजस पूनियां, लोकमंच पत्रिका
तेजस पूनियां, लोकमंच पत्रिका

तेजस पूनियां फिल्म समीक्षक व लेखक हैं। आपके लेख हिन्दी की प्रसिद्ध पत्रिकाओं में लगातार प्रकाशित होते हैं । सम्पर्क – 177 गणगौर नगर , गली नँबर 3, नजदीक आर एल जी गेस्ट हाउस। मोबाइल  – 9166373652, ईमेल- tejaspoonia@gmail.com

50 thoughts on “मात्र दिवस बनकर रह गया पृथ्वी दिवस- तेजस पूनियां

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